swati ki chudai-fir use nind hi nhi aai-fati chut


मैं अकसर इन्टरनेट पर काम किया करता और एक दिन मेरी मुलाकात एक स्वाति नाम की लड़की से हुई। मैं यह तो नहीं जानता कि उसने मेरे अंदर क्या खूबी देखी पर हमने अकसर इन्टरनेट पर खूब बातें करते।
जल्दी ही हमारी दोस्ती नया मोड़ ले रही थी।
एक दिन मैंने उससे उसकी तस्वीर दिखाने के लिए कहा तो उसने कुछ ही दिनों में अपनी कई तस्वीरें मुझे दिखाई।
उसे देखते ही मैं पगला गया, मुझे तो ऐसा लग रहा था जैसे मेरे हाथों कितनी बड़ी हूर की परी लग गयी हो !
उससे इतने मोटे चूचे और चिकनी टांगों से मेरी नज़र हटती ही नहीं थी।
मैंने जब उसकी तस्वीरों पर थोड़ा ध्यान दिया तो उसके घर के माहौल को देखकर पता चल रहा था कि वो किसी रईस की बेटी है।
अब मैंने पूरा ध्यान बस उसे अपने प्यार में फंसाने में लगा दिया।
मैं उससे हमेशा रोमांटिक बातें किया करता जिससे आखिरकार उसने मुझे अपनी तड़प जताते हुए मिलने के लिए कहा।
हमने अपने निहार नगर, दिल्ली के सामने वाले सुनसान पार्क में मिलने के लिए बात तय की।
अगले दिन मैं स्वाति से मिलने उस पार्क में पहुँचा।
वहाँ मैंने देखा की स्वाति ने छोटी से स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें उसकी नंगी टांगें दिखाई दे रही थी और उसके पतले से टॉप के ऊपर से उसके चूचों का गलियारा मेरा ध्यान खींच रहा था।
हम मिले और अपनी बातों में खो ही गए।
उसी दिन मैंने अपने प्यार का इज़हार स्वाति से कर दिया और करीब दो घंटे बात करते करते खूब मगजमारी की।
वहाँ जब स्वाति टॉयलेट गई तो उसके जाते ही मैंने स्वाति के पर्स को टटोला तो देखा कि उसमें कई लड़कों के नंबर लिखे हुए थे और उसकी एक नयी आई.डी भी लिखी हुई थी।
मैंने घर जाते ही उसके इन्टरनेट पर उसका अकाउंट खोल कर देखा तो पता चला कि उसका नाम एक और नाम सिमरन था और वो कई लड़कों से मिलने जाती थी और न जाने कितने से मिल कर उनके साथ घूम फिर कर खूब पैसे भी ऐंठ चुकी होगी।
तभी मुझे पता चला की स्वाति असल में रांड थी जोकि दूसरी आम रंडियों के मुकाबले दुगने रुपये वसूलती थी।
मुझे पूरी रात नींद नहीं आई और मैंने आराम से अपने साथ हुए धोखे का बदला लेने की योजना बनाई।
अगले दिन मैंने स्वाति को उसी पार्क में बुलाया और अपनी योजना के मुताबिक़ उससे खूब रोमांटिक बातें करता हुआ अपनी प्यास बुझाने की ओर चल पड़ा।
मैंने उससे एक चुम्बन मांगते हुए उससे हाथों को सहलाते हुए उसे गर्म करना शुरू कर दिया।
कुछ ही देर में अब हम एक दूसरे को बेसब्री से चूमते हुए एक दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
उसे काफ़ी मज़ा आ रहा था।
तभी मैंने कहा- जान. . आज खो जाओ मेरी आगोश में !
स्वाति- मैं तुम्हारी ही तो हूँ . .
फ़िर क्या था, मैंने उसे वहीँ घास में लेटा दिया और उसके टॉप को उतारकर उसके ब्रा के ऊपर से ही उसके स्तनों को चूमने लगा।
कुछ ही देर में मैंने उसके ब्रा और स्कर्ट को उठा कर उसकी पैंटी को नीचे खींच उंगली करने लगा जिससे वो सिसकारियाँ भरने लगी।
वो उठी और मेरे कपड़े उतारने लगी, उसने मेरी चड्डी को उतार मेरे लण्ड को मुँह में ले लिया कुछ देर बाद तो बस मैंने उसे उसकी टाँगें फ़ैलाई और अपना लण्ड उसकी चूत पर रख दिया और उसकी चूत सहलाते हुए गर्म करने लगा।
तभी मैंने अपना लण्ड उसकी राण्ड चूत में घुसा दिया जिसका पता मुझे तभी चला जब उसे मेरे लण्ड के कारण कतई भी दर्द नहीं हुआ और सिसकारियों से मेरे लण्ड का हौंसला बढ़ाती रही।
कुछ देर बाद मैं उस वहीं घास पर चित्त लिटाये उसे पीछे से कूद–कूद कर चोद रहा था और दूसरी तरफ अपना अँगुलियों से उसके होंठ मिसमिसा रहा था।
क्या मज़ा था यारो . . ! ! मेरी योजना यही थी।
जब आखिर में मैं झड़ने को हुआ तो मैंने सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और उसे कुतिया बना कर लण्ड चटवाने लगा।
तब मैंने कहा,“क्यूँ साली मुझे चूतिया समझती थी ... क्या सोचा था प्यार से जाल में फंसा कर पैसे कमाएगी..!!"
बस इतना कहकर स्वाति को हमेशा के लिए छोड़ आया और आज ऐसी कितनी ही राण्डें मेरे लण्ड को सलामी दे चुकी हैं
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